Cricket: भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में एक बार फिर बड़ा बदलाव हुआ है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अनुभवी कोच शुभदीप घोष को टीम इंडिया का नया फील्डिंग कोच नियुक्त किया है। उन्होंने टी. दिलीप की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। पिछले कुछ दिनों में टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ में लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। पहले सहायक कोच रायन टेन डोइशे टीम से अलग हुए और अब फील्डिंग विभाग की कमान शुभदीप घोष को सौंपी गई है।
हालांकि शुभदीप घोष का नाम आम क्रिकेट प्रशंसकों के लिए नया हो सकता है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के गलियारों में वह लंबे समय से एक सम्मानित कोच के रूप में पहचाने जाते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व नहीं किया, लेकिन घरेलू क्रिकेट, राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA), इंडिया ए और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में वर्षों तक काम करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। यही अनुभव अब उन्हें भारतीय सीनियर टीम तक लेकर आया है।
घरेलू क्रिकेट से शुरू हुआ सफर:
57 वर्षीय शुभदीप घोष का क्रिकेट सफर खिलाड़ी के रूप में शुरू हुआ था। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में असम और रेलवे की ओर से खेला। भले ही उनका खिलाड़ी के रूप में करियर बहुत लंबा या चर्चित नहीं रहा, लेकिन उन्होंने मैदान पर अपने अनुभव को कोचिंग में बदलकर नई पहचान बनाई। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 17 मैचों में 316 रन बनाए, जबकि लिस्ट-ए क्रिकेट में भी 17 मुकाबलों में 307 रन उनके नाम दर्ज हैं। आंकड़ों के लिहाज से उनका करियर साधारण जरूर रहा, लेकिन क्रिकेट की बारीकियों को समझने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक सफल कोच बना दिया।
खिलाड़ी नहीं, कोच के रूप में मिली असली पहचान:
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद शुभदीप घोष ने खुद को पूरी तरह कोचिंग के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने युवा खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए और फील्डिंग को आधुनिक तरीके से सिखाने पर विशेष ध्यान दिया। पिछले करीब डेढ़ दशक में उन्होंने खुद को भारत के सबसे भरोसेमंद फील्डिंग कोचों में शामिल कर लिया। क्रिकेट जगत में उन्हें ‘जॉय’ नाम से भी जाना जाता है। खिलाड़ियों के साथ उनका व्यवहार, तकनीकी समझ और व्यक्तिगत मार्गदर्शन उन्हें अन्य कोचों से अलग बनाता है।
हर खिलाड़ी के लिए अलग रणनीति बनाते हैं शुभदीप घोष:
शुभदीप घोष की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि वे हर खिलाड़ी को एक ही नजरिए से नहीं देखते। वह पहले खिलाड़ी की शारीरिक क्षमता, मूवमेंट, रिफ्लेक्स, ताकत और कमजोरियों का विश्लेषण करते हैं। इसके बाद उसी के अनुसार अभ्यास का कार्यक्रम तैयार करते हैं। यही वजह है कि उनके साथ काम करने वाले कई खिलाड़ियों ने उनकी कोचिंग शैली की खुलकर तारीफ की है। आधुनिक क्रिकेट में जहां फील्डिंग मैच का रुख बदल सकती है, वहां ऐसे विशेषज्ञ की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
गौतम गंभीर के साथ पुराना है रिश्ता:
शुभदीप घोष और टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर का साथ नया नहीं है। दोनों लगभग एक दशक पहले भी साथ काम कर चुके हैं। साल 2014 में जब गौतम गंभीर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान थे, तब शुभदीप घोष टीम के सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा थे। उस दौरान दोनों ने मिलकर खिलाड़ियों की फील्डिंग और टीम कल्चर पर काम किया था। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर शुभदीप की कार्यशैली से पहले से परिचित हैं। यही भरोसा उनकी टीम इंडिया में नियुक्ति की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
NCA और इंडिया ए में निभाई अहम भूमिका:
शुभदीप घोष का अधिकांश कोचिंग करियर भारतीय क्रिकेट के विकास ढांचे में बीता है। उन्होंने नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) में कई उभरते खिलाड़ियों के साथ काम किया। इसके अलावा वह इंडिया ए टीम के साथ भी लंबे समय तक जुड़े रहे। हाल ही में श्रीलंका दौरे पर इंडिया ए टीम के साथ उन्होंने युवा खिलाड़ियों की फील्डिंग और फिटनेस पर विशेष काम किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने तिलक वर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ऋतुराज गायकवाड़ समेत कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया। खिलाड़ियों से मिले सकारात्मक फीडबैक ने भी उनकी दावेदारी को मजबूत किया।
आईपीएल में भी दिखाया कोचिंग का दम:
घरेलू क्रिकेट के अलावा शुभदीप घोष इंडियन प्रीमियर लीग में भी अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और दिल्ली कैपिटल्स जैसी फ्रेंचाइजी के साथ काम किया। आईपीएल जैसे हाई-प्रेशर टूर्नामेंट में खिलाड़ियों की फील्डिंग, कैचिंग और ग्राउंड मूवमेंट पर उनका काम काफी सराहा गया। टी20 क्रिकेट में जहां एक शानदार कैच या रन आउट पूरे मैच का नतीजा बदल सकता है, वहां फील्डिंग कोच की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
टी. दिलीप की जगह मिली बड़ी जिम्मेदारी:
टी. दिलीप लंबे समय तक भारतीय टीम के फील्डिंग कोच रहे और खिलाड़ियों की फील्डिंग में सुधार के लिए उनकी काफी सराहना हुई। लेकिन हालिया बदलावों के तहत बीसीसीआई ने उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया। अब उनकी जगह शुभदीप घोष को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भारतीय टीम की पहले से मजबूत फील्डिंग को और बेहतर बनाना होगी।
टीम इंडिया में क्या होगी उनकी भूमिका:
आधुनिक क्रिकेट में फील्डिंग केवल कैच पकड़ने तक सीमित नहीं रह गई है। अब खिलाड़ियों की फिटनेस, प्रतिक्रिया की गति, थ्रो की सटीकता, बाउंड्री सेविंग और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। शुभदीप घोष का अनुभव इन सभी क्षेत्रों में भारतीय खिलाड़ियों को फायदा पहुंचा सकता है। खासकर युवा खिलाड़ियों के साथ उनका काम करने का अनुभव टीम के भविष्य को मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
गंभीर की नई कोचिंग टीम का अहम हिस्सा:
गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ में कई बदलाव हुए हैं। अब बल्लेबाजी कोच, गेंदबाजी कोच, स्पिन गेंदबाजी कोच और फील्डिंग कोच के रूप में विशेषज्ञों की अलग-अलग टीम तैयार की गई है। इस नई संरचना में शुभदीप घोष की नियुक्ति केवल एक पद भरने का फैसला नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की फील्डिंग संस्कृति को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
ThePage1 Analysis:
शुभदीप घोष का सफर यह साबित करता है कि क्रिकेट में सफलता केवल अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने से नहीं मिलती, बल्कि मेहनत, विशेषज्ञता और लगातार सीखने की इच्छा भी आपको सबसे बड़े मंच तक पहुंचा सकती है। असम और रेलवे के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले शुभदीप ने वर्षों तक पर्दे के पीछे रहकर भारतीय क्रिकेट की नई पीढ़ी को तैयार किया। अब टीम इंडिया के नए फील्डिंग कोच के रूप में उनके सामने दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ भारतीय खिलाड़ियों की फील्डिंग को नई ऊंचाई तक ले जाने की जिम्मेदारी होगी। गौतम गंभीर के साथ उनकी पुरानी समझ और घरेलू क्रिकेट में अर्जित अनुभव इस नई भूमिका में भारतीय टीम के लिए अहम साबित हो सकता है।
Leave a Reply