Cricket: भारतीय क्रिकेट टीम के लिए पिछले दो वर्ष केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि ड्रेसिंग रूम के भीतर भी बड़े बदलावों के गवाह रहे हैं। टी20 विश्व कप 2024 जीतने के बाद जब राहुल द्रविड़ का कार्यकाल समाप्त हुआ, तब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर को टीम इंडिया का नया मुख्य कोच नियुक्त किया। गंभीर के साथ एक नए सपोर्ट स्टाफ का गठन भी किया गया, जिसमें भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों का संतुलित मिश्रण देखने को मिला। उस समय उम्मीद की जा रही थी कि यह टीम लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की दिशा तय करेगी, लेकिन महज दो वर्षों के भीतर ही इस कोचिंग स्टाफ में तीन बड़े बदलाव हो चुके हैं।
आज स्थिति यह है कि जुलाई 2024 में गंभीर के साथ काम शुरू करने वाले स्टाफ में गौतम गंभीर और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ही ऐसे सदस्य हैं जो अब भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बाकी तीन प्रमुख चेहरों की जगह नए विशेषज्ञों ने ले ली है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दो वर्षों में ऐसा क्या हुआ कि टीम इंडिया का पूरा सपोर्ट स्टाफ लगभग बदल गया? आइए विस्तार से समझते हैं।
राहुल द्रविड़ युग का अंत, गौतम गंभीर युग की शुरुआत:
टी20 विश्व कप 2024 में भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद राहुल द्रविड़ का बतौर मुख्य कोच कार्यकाल समाप्त हो गया। द्रविड़ ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह अपना अनुबंध आगे नहीं बढ़ाएंगे। इसके बाद बीसीसीआई ने नए मुख्य कोच की तलाश शुरू की और अंततः गौतम गंभीर को यह जिम्मेदारी सौंपी।
गंभीर का चयन केवल उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव के आधार पर नहीं था, बल्कि हाल के वर्षों में आईपीएल में बतौर मेंटर और रणनीतिकार उनकी सफलता ने भी बोर्ड को प्रभावित किया। टीम की कमान संभालते ही उन्होंने अपने अनुसार सपोर्ट स्टाफ तैयार किया।
जुलाई 2024 में कैसी थी गंभीर की पहली कोचिंग टीम:
जब गौतम गंभीर ने जिम्मेदारी संभाली तो उनके साथ एक मजबूत कोचिंग यूनिट बनाई गई। इस टीम में अभिषेक नायर और रयान टेन डोएशेट को असिस्टेंट कोच बनाया गया। दोनों की भूमिका खिलाड़ियों के तकनीकी विकास और रणनीतिक तैयारियों में अहम थी। गेंदबाजी विभाग की जिम्मेदारी दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज मोर्ने मोर्केल को सौंपी गई। उनके अनुभव को भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
फील्डिंग विभाग में टी. दिलीप को बरकरार रखा गया। वह राहुल द्रविड़ के कार्यकाल में भी फील्डिंग कोच थे और खिलाड़ियों के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी। उस समय बल्लेबाजी कोच का अलग पद नहीं था। बल्लेबाजी से जुड़ी जिम्मेदारियां मुख्य रूप से मुख्य कोच और असिस्टेंट कोच मिलकर संभालते थे।
दो वर्षों में क्यों बदल गया पूरा सपोर्ट स्टाफ:
जुलाई 2024 से अगस्त 2026 के बीच भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में लगातार बदलाव हुए। इन बदलावों के पीछे अलग-अलग कारण रहे। सबसे पहले अभिषेक नायर को बीसीसीआई ने उनके पद से हटा दिया। बोर्ड ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से अधिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन इसके बाद टीम के सपोर्ट स्टाफ में पहली बड़ी रिक्ति पैदा हुई।
इसके बाद रयान टेन डोएशेट ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने व्यक्तिगत परिस्थितियों को प्राथमिकता देते हुए टीम इंडिया से अलग होने का फैसला लिया।
तीसरा बड़ा बदलाव तब हुआ जब टी. दिलीप का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। लंबे समय तक टीम के साथ जुड़े रहने के बावजूद बीसीसीआई ने फील्डिंग विभाग में नए चेहरे को मौका देने का निर्णय लिया। इन तीन बदलावों के बाद गौतम गंभीर के शुरुआती सपोर्ट स्टाफ की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
नई सोच के साथ बदला कोचिंग मॉडल:
सिर्फ चेहरे ही नहीं बदले, बल्कि बीसीसीआई ने कोचिंग संरचना में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किया। पहले जहां टीम में दो असिस्टेंट कोच हुआ करते थे, वहीं अब बोर्ड ने इस व्यवस्था को बदल दिया। असिस्टेंट कोच के पद को समाप्त कर विशेषज्ञ आधारित कोचिंग मॉडल अपनाया गया। इस नए मॉडल के तहत बल्लेबाजी और स्पिन गेंदबाजी के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ नियुक्त किए गए, ताकि खिलाड़ियों को अधिक तकनीकी और विषय आधारित मार्गदर्शन मिल सके। यह बदलाव आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनाए जा रहे विशेषज्ञ कोचिंग मॉडल के अनुरूप माना जा रहा है।
अब कैसी है गौतम गंभीर की नई टीम:
अगस्त 2026 तक टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ की तस्वीर पहले से काफी अलग हो चुकी है। मुख्य कोच के रूप में गौतम गंभीर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बल्लेबाजी कोच के रूप में सीतांशु कोटक टीम से जुड़े हैं। घरेलू क्रिकेट और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। गेंदबाजी विभाग की कमान अब भी मोर्ने मोर्केल के हाथों में है। वह गंभीर की शुरुआती टीम के इकलौते सदस्य हैं जो अब तक अपने पद पर बने हुए हैं। स्पिन गेंदबाजी को मजबूत करने के लिए साईराज बहुतुले को स्पिन-बॉलिंग कोच बनाया गया है। घरेलू क्रिकेट में उनका अनुभव युवा स्पिनरों के विकास में उपयोगी माना जा रहा है। वहीं, फील्डिंग विभाग की जिम्मेदारी अब सुभादीप घोष संभाल रहे हैं, जिन्होंने टी. दिलीप की जगह ली है।
जुलाई 2024 बनाम अगस्त 2026: कितना बदल गया सपोर्ट स्टाफ:
यदि दोनों समय की तुलना करें तो स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि टीम इंडिया की कोचिंग संरचना में बड़ा बदलाव आया है।
जुलाई 2024:
मुख्य कोच – गौतम गंभीर
असिस्टेंट कोच – अभिषेक नायर
असिस्टेंट कोच – रयान टेन डोएशेट
गेंदबाजी कोच – मोर्ने मोर्केल
फील्डिंग कोच – टी. दिलीप
अगस्त 2026:
मुख्य कोच – गौतम गंभीर
बल्लेबाजी कोच – सीतांशु कोटक
गेंदबाजी कोच – मोर्ने मोर्केल
स्पिन गेंदबाजी कोच – साईराज बहुतुले
फील्डिंग कोच – सुभादीप घोष
यह तुलना बताती है कि दो वर्षों में केवल तीन चेहरे ही नहीं बदले, बल्कि पूरे कोचिंग मॉडल में संरचनात्मक बदलाव भी किए गए हैं।
क्या इन बदलावों का असर टीम के प्रदर्शन पर पड़ेगा:
किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए कोचिंग स्टाफ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। मुख्य कोच रणनीति तय करता है, जबकि बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग विशेषज्ञ खिलाड़ियों की तकनीकी कमियों को दूर करने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग विभागों के लिए अलग कोच नियुक्त करने से खिलाड़ियों को व्यक्तिगत स्तर पर अधिक सहायता मिलेगी। खासकर स्पिन गेंदबाजी और बल्लेबाजी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ कोच टीम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, बार-बार बदलाव से खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के बीच तालमेल बनाने में समय भी लग सकता है। इसलिए आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में इस नई संरचना की वास्तविक परीक्षा होगी।
मोर्ने मोर्केल क्यों बने हुए हैं सबसे भरोसेमंद सदस्य:
दो वर्षों में कई बदलावों के बावजूद मोर्ने मोर्केल का अपने पद पर बने रहना इस बात का संकेत है कि टीम प्रबंधन और बीसीसीआई दोनों उनके काम से संतुष्ट हैं। भारतीय तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण मानी गई है। युवा गेंदबाजों के साथ उनका अनुभव और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की समझ उन्हें टीम के लिए एक महत्वपूर्ण सदस्य बनाती है।
ThePage1 Analysis:
जुलाई 2024 में जब गौतम गंभीर ने टीम इंडिया की कमान संभाली थी, तब उनके साथ एक नई कोचिंग टीम भी आई थी। लेकिन महज दो वर्षों में इस टीम के तीन प्रमुख सदस्य बदल चुके हैं। अब केवल गौतम गंभीर और मोर्ने मोर्केल ही शुरुआती टीम का हिस्सा बचे हैं। वहीं बीसीसीआई ने विशेषज्ञ आधारित कोचिंग मॉडल अपनाकर बल्लेबाजी, स्पिन गेंदबाजी और फील्डिंग के लिए नए चेहरे जोड़े हैं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों और बड़े टूर्नामेंटों में यही नई कोचिंग टीम भारतीय क्रिकेट को नई दिशा देने की कोशिश करेगी।
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