BPSC AEDO परीक्षा धांधली: एक परीक्षा की धांधली से खुला बड़ा नेटवर्क, AEDO केस में 6 गिरफ्तार; जांच में कई भर्ती परीक्षाओं के राजफाश

BPSC AEDO परीक्षा धांधली: बिहार लोक सेवा आयोग की AEDO भर्ती परीक्षा में कथित धांधली की जांच अब सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई में सॉल्वर नेटवर्क, बायोमेट्रिक सिस्टम और कथित सेटिंग से जुड़े ऐसे सुराग सामने आए हैं, जिनकी कड़ियां कई दूसरी भर्ती परीक्षाओं तक पहुंचती दिखाई दे रही हैं। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने BPSC की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी यानी AEDO परीक्षा में कथित धांधली के मामले में दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। सोहसराय थाना कांड संख्या 106/26 की जांच के दौरान हुई इस कार्रवाई में नालंदा जिले के नुरसराय थाना क्षेत्र के ककड़िया निवासी 22 वर्षीय रौशन कुमार और सोहसराय थाना क्षेत्र के तलाब पर 17 नंबर निवासी 25 वर्षीय आकाश कुमार को पकड़ा गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, रौशन कुमार मुंबई स्थित भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर यानी BARC में प्रशिक्षण ले रहा था। EOU ने उसे इस कथित नेटवर्क का प्रमुख सदस्य बताया है। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस कार्रवाई के साथ AEDO परीक्षा धांधली मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या छह हो गई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, परीक्षा केंद्रों तक पहुंच कैसे बनाई गई और कथित तौर पर अभ्यर्थियों को मदद पहुंचाने के लिए किस स्तर पर व्यवस्था को प्रभावित किया गया।

25 लाख रुपये में पास कराने की कथित डील:
EOU की जांच में AEDO परीक्षा को लेकर सबसे गंभीर आरोप कथित तौर पर 25 लाख रुपये की डील का है। एजेंसी के अनुसार, BPSC की विज्ञापन संख्या 87/2025 के तहत आयोजित AEDO परीक्षा में परीक्षार्थी श्वेता कुमारी को पास कराने के लिए कथित तौर पर 25 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। जांच में आकाश कुमार, चंदन कुमार, बायोमेट्रिक सुपरवाइजर, बायोमेट्रिक कंपनी से जुड़े वेंडर और जिला समन्वयक समेत कई लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। यही वह बिंदु है, जहां मामला सामान्य परीक्षा कदाचार से आगे बढ़कर एक संगठित नेटवर्क की संभावित तस्वीर पेश करता है। अगर जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं तो इसका मतलब होगा कि कथित तौर पर परीक्षा केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण चरणों को भी प्रभावित करने की कोशिश की गई।

बायोमेट्रिक सिस्टम में कथित सेंध:
EOU के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर तैनात अधिकृत बायोमेट्रिक सुपरवाइजर की जगह कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्र के जरिए दूसरे व्यक्ति को प्रवेश दिलाया गया। इसके बाद होलोग्राम पर्ची के बीच उत्तर कुंजी छिपाकर परीक्षार्थी तक पहुंचाने की कोशिश किए जाने का आरोप है। परीक्षा व्यवस्था में बायोमेट्रिक सत्यापन का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना होता है कि सही अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में प्रवेश करे। ऐसे में इस स्तर पर कथित हेरफेर का आरोप जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। EOU अब इस बात की जांच कर रही है कि फर्जी पहचान पत्र किसने तैयार किया, संबंधित व्यक्ति को परीक्षा केंद्र तक किसने पहुंचाया और बायोमेट्रिक व्यवस्था में शामिल लोगों की भूमिका क्या थी।

जिस परीक्षा में बैठा, उसी में सेटिंग का आरोप:
जांच में रौशन कुमार को लेकर भी एक दिलचस्प जानकारी सामने आई है। EOU के अनुसार, वह खुद AEDO परीक्षा का अभ्यर्थी था और उसका परीक्षा केंद्र मोतिहारी में निर्धारित था। आरोप है कि उसने अपने परीक्षा केंद्र पर भी बायोमेट्रिक स्टाफ के साथ कथित सेटिंग की थी। यानी जांच एजेंसी के सामने यह सवाल भी है कि क्या आरोपी केवल दूसरे अभ्यर्थियों के लिए नेटवर्क का हिस्सा था या वह खुद भी कथित व्यवस्था का लाभ लेने की कोशिश कर रहा था। यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जांचकर्ताओं को नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उसके संभावित सदस्यों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

भागलपुर में ब्लूटूथ के जरिए उत्तर पहुंचाने की कोशिश:
EOU के मुताबिक, रौशन कुमार अपने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ भागलपुर भी गया था। वहां कथित तौर पर ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से परीक्षार्थियों तक उत्तर पहुंचाने का प्रयास किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क पिछले चार से पांच वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित सेटिंग के जरिए अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का काम कर रहा था। अगर यह दावा जांच में पुष्ट होता है तो AEDO परीक्षा का मामला किसी एक परीक्षा केंद्र या कुछ लोगों की कथित लापरवाही से कहीं बड़ा हो सकता है।

दूसरी भर्ती परीक्षाएं भी जांच के दायरे में:
AEDO परीक्षा की जांच के दौरान EOU को अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी कथित गड़बड़ियों के संकेत मिलने की बात कही गई है। इनमें केंद्रीय चयन पर्षद की रेडियो ऑपरेटर परीक्षा, मद्य निषेध सिपाही भर्ती परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा झारखंड CGL परीक्षा और बिहार के कुछ ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों में भी कथित धांधली के संकेत मिलने की बात एजेंसी ने कही है। हालांकि इन मामलों में जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। यही कारण है कि EOU की मौजूदा कार्रवाई को सिर्फ AEDO परीक्षा तक सीमित कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या नए नाम सामने आ सकते हैं।

NEET UG-2023 मामले से भी जुड़ रहे तार:
जांच एजेंसी के अनुसार, आकाश कुमार और रौशन कुमार का संबंध पहले के NEET UG-2023 मामले से भी सामने आया है। एजेंसी का कहना है कि इस मामले में एक अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाकर उसे पास कराने की कोशिश से जुड़े तथ्य मिले हैं। फिलहाल संबंधित अभ्यर्थी की पहचान की प्रक्रिया जारी बताई गई है। अगर अलग-अलग मामलों में आरोपितों की भूमिका जांच में प्रमाणित होती है तो इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि क्या एक ही नेटवर्क विभिन्न परीक्षाओं में अलग-अलग तरीकों से कथित धांधली कर रहा था।

अमीन भर्ती परीक्षा में भी कथित सेटिंग:
जांच का एक और सिरा बिहार तकनीकी सेवा आयोग की अमीन भर्ती परीक्षा तक पहुंचा है। EOU के मुताबिक, कथित सेटिंग के जरिए दो अभ्यर्थियों को पास कराने की बात सामने आई है। जांच में दोनों से 3.50-3.50 लाख रुपये लेने की बात भी सामने आने का दावा किया गया है। इतना ही नहीं, बकाया राशि की वसूली के लिए दोनों अभ्यर्थियों के कथित अपहरण की साजिश से जुड़े इनपुट मिलने की बात भी एजेंसी ने कही है। यह आरोप मामले को सिर्फ परीक्षा में कथित कदाचार से आगे ले जाता है और कथित नेटवर्क के आर्थिक तथा आपराधिक पहलुओं की ओर भी इशारा करता है।

छह गिरफ्तारियां, लेकिन जांच अभी बाकी:
AEDO परीक्षा धांधली मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें परीक्षार्थी, बायोमेट्रिक सुपरवाइजर, बायोमेट्रिक ऑपरेटर और बायोमेट्रिक कंपनी से जुड़े वेंडर शामिल बताए गए हैं। पूछताछ के दौरान EOU को परीक्षा केंद्रों, बायोमेट्रिक व्यवस्था, सॉल्वर गैंग और कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की बात कही गई है। अब जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित नेटवर्क की वास्तविक पहुंच कितनी दूर तक थी। क्या अलग-अलग परीक्षाओं में एक ही तंत्र सक्रिय था? क्या परीक्षा केंद्रों के स्तर पर मिलीभगत थी? और कथित तौर पर लाखों रुपये लेने वाले इस नेटवर्क में पैसा किन लोगों तक पहुंचता था? इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है।

ThePage1 Analysis:
AEDO परीक्षा धांधली की जांच ने एक बार फिर बिहार की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल खड़ा किया है। परीक्षा में अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन से लेकर परीक्षा केंद्र की निगरानी तक कई स्तर बनाए गए हैं। ऐसे में यदि जांच एजेंसी के आरोप सही साबित होते हैं, तो समस्या केवल कुछ अभ्यर्थियों या कथित सॉल्वर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी परीक्षा सुरक्षा प्रणाली की कमजोरियों की समीक्षा करनी होगी। सबसे गंभीर पहलू यह है कि जांच के दौरान दूसरी भर्ती परीक्षाओं तक कथित नेटवर्क के तार पहुंचने की बात सामने आई है। ऐसे में कार्रवाई का असली पैमाना केवल गिरफ्तारियों की संख्या नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र को उजागर करना होगा जो पैसे के बदले मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करता है।

बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए परीक्षा सिर्फ एक अवसर नहीं होती, बल्कि वर्षों की मेहनत और परिवार की उम्मीदों से जुड़ी होती है। इसलिए इस मामले में तेज, निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच जरूरी है। आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है, लेकिन जांच में सामने आए संकेत यह जरूर बताते हैं कि भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवालों के जवाब अब टाले नहीं जा सकते।

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