Bihar News: बिहार के राजस्व विभाग में क्या चल रहा है? एक महीने में बदला ट्रांसफर आदेश, फिर मिली पुरानी पोस्टिंग

Bihar News: बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की नई ट्रांसफर-पोस्टिंग सूची ने प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। विभाग ने 6 अगस्त को बिहार राजस्व सेवा के 20 अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापन की अधिसूचना जारी की, लेकिन इस सूची का सबसे चर्चित फैसला पालीगंज के अंचल अधिकारी (CO) महेश कुमार की दोबारा उसी पद पर वापसी रहा। महज एक महीने पहले, 30 जून 2026 को जारी आदेश में उन्हें पालीगंज से हटाकर शिवहर जिले में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया था। अब विभाग ने उसी आदेश को बदलते हुए उन्हें फिर से पालीगंज का अंचल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। यह फैसला केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्थिरता पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर ऐसा क्या बदल गया कि एक महीने पहले जिस अधिकारी को हटाया गया, उसे फिर उसी कुर्सी पर वापस बैठा दिया गया?

20 अधिकारियों की ट्रांसफर सूची में सबसे ज्यादा चर्चा पालीगंज की:
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना के अनुसार राज्य के विभिन्न जिलों में 20 राजस्व सेवा अधिकारियों का तबादला किया गया है। पल्लवी कुमारी गुप्ता को लखीसराय के चानन अंचल का अंचल अधिकारी बनाया गया है, जबकि मृत्युंजय कुमार को सूर्यगढ़ा अंचल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रोहन रंजन सिंह को पिपरिया, पृथा अखौरी को नालंदा के वेन अंचल, पवन कुमार साह को बख्तियारपुर और रवि रंजन को इसुआपुर का अंचल अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा रजनी कुमारी को मटिहानी अंचल में पदस्थापित किया गया है। विभाग का कहना है कि यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन पालीगंज के मामले ने पूरी सूची का केंद्र बिंदु बदल दिया है।

30 जून को हटाया, 6 अगस्त को फिर लौटाया:
पालीगंज के अंचल अधिकारी महेश कुमार को 30 जून 2026 को जारी आदेश के तहत उनके पद से हटाकर शिवहर में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया था। उनकी जगह सौरव कुमार को पालीगंज का नया अंचल अधिकारी नियुक्त किया गया था। हालांकि, यह व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं चली। 6 अगस्त को जारी नई अधिसूचना में विभाग ने महेश कुमार को फिर से पालीगंज का अंचल अधिकारी बना दिया। वहीं सौरव कुमार को हटाकर उसी पद पर भेज दिया गया, जहां पहले महेश कुमार को भेजा गया था, यानी शिवहर जिले के सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के रूप में। प्रशासनिक हलकों में इस बदलाव को असामान्य माना जा रहा है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में इतनी जल्दी किसी अधिकारी की उसी पद पर वापसी कम ही देखने को मिलती है।

क्या था विभाग का आधार:
फिलहाल विभाग की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। अधिसूचना में केवल नई पदस्थापनाओं का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि 30 जून के आदेश में संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी। यही वजह है कि राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्षी दल भी इस प्रकार की ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था पर सवाल उठा सकते हैं, क्योंकि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और स्थिरता प्रशासन की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा माना जाता है।

इसुआपुर के CO का भी तेजी से तबादला:
नई सूची में एक और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इसुआपुर के अंचल अधिकारी शैलेंद्र कुमार यादव को 2 जुलाई को ही दाउदनगर से स्थानांतरित कर इसुआपुर भेजा गया था। लेकिन अब उन्हें भी एक महीने के भीतर मधुबनी जिले के बिस्फी अंचल का अंचल अधिकारी बना दिया गया है। शैलेंद्र कुमार यादव के खिलाफ पहले भी विभिन्न प्रकार के आरोप लग चुके हैं। हालांकि विभाग की ओर से उन आरोपों पर किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बजाय उन्हें दूसरे अंचल में नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले ने भी प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रांसफर-पोस्टिंग पर फिर उठे सवाल:
बिहार में समय-समय पर अधिकारियों के तबादले होते रहे हैं, लेकिन जब किसी अधिकारी को बेहद कम समय में उसी स्थान पर वापस भेज दिया जाता है, तो यह स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं होती, बल्कि इसका उद्देश्य बेहतर प्रशासन, जवाबदेही और निष्पक्ष कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना भी होता है। ऐसे में यदि आदेश बार-बार बदलते हैं, तो इससे न केवल अधिकारियों बल्कि आम जनता के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर असर:
राजस्व विभाग का काम सीधे आम नागरिकों से जुड़ा होता है। जमीन, दाखिल-खारिज, जमाबंदी, भूमि विवाद और सरकारी योजनाओं से संबंधित अधिकांश कार्य अंचल कार्यालयों के माध्यम से ही होते हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसी अंचल में लगातार अधिकारियों का बदलाव होता है या एक ही अधिकारी को बार-बार उसी स्थान पर नियुक्त किया जाता है, तो इससे प्रशासनिक निरंतरता प्रभावित होने की आशंका भी रहती है। स्थानीय स्तर पर चल रहे मामलों और लंबित फाइलों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सरकार की पारदर्शिता पर उठ सकते हैं सवाल:
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ट्रांसफर-पोस्टिंग का आधार स्पष्ट होना चाहिए। यदि किसी अधिकारी को हटाया जाता है और कुछ ही सप्ताह बाद बिना सार्वजनिक कारण बताए उसी पद पर वापस भेज दिया जाता है, तो इससे निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि सरकार के पास प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार तबादले करने का अधिकार है, लेकिन ऐसे मामलों में स्पष्ट कारण सार्वजनिक करने से अनावश्यक विवाद और अटकलों से बचा जा सकता है।

ThePage1 Analysis:
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की नई ट्रांसफर-पोस्टिंग सूची में पालीगंज के अंचल अधिकारी महेश कुमार की एक महीने के भीतर उसी पद पर वापसी सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गई है। विभाग ने अभी तक इस बदलाव के पीछे कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। ऐसे में इस फैसले को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि प्रशासनिक तबादले सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन पारदर्शिता और स्पष्ट कारणों का अभाव निर्णयों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में यदि विभाग इस बदलाव का औचित्य स्पष्ट करता है तो कई अटकलों पर विराम लग सकता है। फिलहाल यह मामला बिहार की प्रशासनिक कार्यशैली और ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रणाली पर नई बहस जरूर खड़ी करता है।

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