Bihar Cabinet Meeting: बिहार सरकार ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ को व्यापक स्तर पर आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस अभियान के लिए 6 करोड़ 12 लाख रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 17 एजेंडों पर मुहर लगी। कैबिनेट की बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव समेत मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य मौजूद रहे। सरकार के इस फैसले के बाद अब कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से अभियान को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज होगी।
17 प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर:
बिहार कैबिनेट की बैठक सरकार के प्रशासनिक और विकासात्मक फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण रही। बैठक में कुल 17 एजेंडों को मंजूरी दी गई। इनमें ‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ के लिए राशि की स्वीकृति भी शामिल है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कला एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से अभियान से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए ₹6,12,00,000 की राशि स्वीकृत की गई है। सरकार का जोर इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों की भागीदारी से व्यापक जनअभियान बनाने पर है।
तिरंगा रैली से लेकर ‘सेल्फी विद तिरंगा’ तक:
‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के माहौल को देशभक्ति की भावना से जोड़ना और लोगों को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान के लिए प्रेरित करना होगा। अभियान के प्रमुख कार्यक्रमों में तिरंगा रैली और तिरंगा यात्रा शामिल हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा ‘सेल्फी विद तिरंगा’ अभियान भी चलाया जाएगा। इसके जरिए लोग तिरंगे के साथ अपनी तस्वीर साझा कर अभियान से जुड़ सकेंगे। सोशल मीडिया के माध्यम से भी अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की योजना है।
‘वंदे मातरम्’ थीम पर होंगे कार्यक्रम:
इस साल अभियान में ‘वंदे मातरम्’ को भी प्रमुख थीम के रूप में शामिल किया गया है। इसके तहत देशभक्ति तिरंगा कंसर्ट आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता का संदेश लोगों तक पहुंचाने की कोशिश होगी। साथ ही ‘वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। इन प्रदर्शनियों में तिरंगे और राष्ट्रगान से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को प्रदर्शित किया जा सकता है।
रंगोली और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बनेगा माहौल:
अभियान के दौरान सिर्फ रैलियों और कंसर्ट तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहेंगे। तिरंगा थीम पर आधारित रंगोली और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी के जरिए देशभक्ति से जुड़े गीत, संगीत और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित करने की योजना है। इसका उद्देश्य यह है कि अभियान में समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन भी अभियान का हिस्सा होगा। इससे स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सामूहिक भागीदारी का माहौल बनाने की कोशिश की जाएगी।
सरकारी भवनों पर दिखेगा तिरंगे का रंग:
‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ के दौरान सरकारी भवनों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। इसके तहत प्रमुख सरकारी भवनों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर त्रिवर्णीय प्रकाशांकन किया जाएगा। रात के समय रोशनी के माध्यम से सरकारी इमारतों को तिरंगे के रंगों में सजाने की योजना है। इसका उद्देश्य शहरों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्रता दिवस की थीम को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित करना है। इस तरह अभियान का असर केवल कार्यक्रम स्थलों तक सीमित न रहकर सार्वजनिक स्थानों और शहरों के प्रमुख हिस्सों में भी दिखाई देने की उम्मीद है।
जनजागरूकता पर भी रहेगा जोर:
कला एवं संस्कृति विभाग के अनुसार, अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य लोगों में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाना है। इसके लिए विभिन्न माध्यमों से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोगों को तिरंगे के सम्मान, उसके महत्व और स्वतंत्रता दिवस से जुड़े राष्ट्रीय मूल्यों के बारे में जानकारी दी जाएगी। सरकार का प्रयास है कि अभियान में अधिक से अधिक नागरिक स्वेच्छा से शामिल हों और इसे केवल सरकारी आयोजन के बजाय सामूहिक उत्सव का रूप दिया जाए।
स्वतंत्रता दिवस से पहले बढ़ेगी गतिविधियां:
‘हर घर तिरंगा अभियान’ स्वतंत्रता दिवस के आसपास आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को एक साझा मंच देने की कोशिश है। बिहार में इस अभियान के तहत जिला और स्थानीय स्तर पर भी गतिविधियां आयोजित किए जाने की संभावना है। तिरंगा यात्राओं से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक अलग-अलग कार्यक्रम लोगों को अभियान से जोड़ने का माध्यम बनेंगे। स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्थान, सामाजिक संगठन और आम नागरिक इसमें अपनी भागीदारी निभा सकते हैं। इसका एक बड़ा उद्देश्य युवाओं को देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व से जोड़ना भी है।
6.12 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला क्यों महत्वपूर्ण:
सरकार ने अभियान के लिए 6.12 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह रकम कार्यक्रमों के आयोजन, सांस्कृतिक गतिविधियों, प्रचार-प्रसार, प्रदर्शनी, सजावट और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं पर खर्च की जाएगी। हालांकि, इतनी बड़ी राशि खर्च किए जाने के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण होगा कि अभियान का बजट किस तरह और कितनी पारदर्शिता से इस्तेमाल किया जाता है। बड़े स्तर पर होने वाले सरकारी आयोजनों में खर्च और परिणाम के बीच संतुलन बनाए रखना हमेशा अहम होता है। अगर इस बजट का इस्तेमाल व्यापक जनभागीदारी, स्थानीय कलाकारों और युवाओं को जोड़ने तथा प्रभावी जनजागरूकता के लिए किया जाता है, तो अभियान का प्रभाव केवल स्वतंत्रता दिवस तक सीमित नहीं रहेगा।
बिहार में देशभक्ति कार्यक्रमों को मिलेगा बड़ा मंच:
बिहार का स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। चंपारण सत्याग्रह से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के कई अध्याय राज्य की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े हैं। ऐसे में तिरंगा और स्वतंत्रता दिवस से जुड़े कार्यक्रमों को बिहार में विशेष महत्व मिलना स्वाभाविक है। ‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ के जरिए सरकार इसी ऐतिहासिक और राष्ट्रीय भावना को आधुनिक कार्यक्रमों के साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। तिरंगा रैली, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी और डिजिटल अभियान के जरिए अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को जोड़ने की योजना बनाई गई है।
ThePage1 Analysis:
‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ के लिए 6.12 करोड़ रुपये की मंजूरी बिहार सरकार का एक बड़ा आयोजनात्मक फैसला है। इसका उद्देश्य केवल स्वतंत्रता दिवस के दौरान तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभक्ति को जनभागीदारी, संस्कृति और सार्वजनिक गतिविधियों से जोड़ना है।
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापकता हो सकती है। तिरंगा यात्रा से लेकर ‘सेल्फी विद तिरंगा’, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लेकर सरकारी भवनों की त्रिवर्णीय रोशनी तक, सरकार ने अभियान को कई स्तरों पर लोगों से जोड़ने की योजना बनाई है। लेकिन इसकी सफलता का वास्तविक पैमाना कार्यक्रमों की संख्या नहीं, बल्कि जनभागीदारी और खर्च की पारदर्शिता होगी। 6.12 करोड़ रुपये का बजट तभी सार्थक माना जाएगा, जब इसका लाभ केवल बड़े शहरों और सरकारी आयोजनों तक सीमित न रहकर बिहार के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों तक पहुंचे। अगर सरकार स्थानीय कलाकारों, युवाओं, स्कूल-कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को अभियान में प्रभावी ढंग से जोड़ती है, तो ‘हर घर तिरंगा’ महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार में स्वतंत्रता दिवस को लेकर एक व्यापक सामाजिक अभियान का रूप ले सकता है।
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