JPSC-JSSC विवाद: देवेंद्र महतो का अनशन जारी, सिर्फ पानी पीने से उठीं चर्चाएं; झारखंड छात्र आंदोलन ने पकड़ी नई रफ्तार

JPSC-JSSC विवाद: झारखंड की राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। JPSC और JSSC CGL भर्ती परीक्षाओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल एक परीक्षा या एक भर्ती प्रक्रिया की नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य की है। इसी बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल को लेकर फैली चर्चाओं पर भी आंदोलनकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है। उनका दावा है कि महतो ने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आग्रह पर केवल पानी पिया था, क्योंकि लगातार अनशन के कारण उनके होंठ सूख गए थे। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार जांच और कार्रवाई का भरोसा दिला रही है। ऐसे में झारखंड की राजनीति और प्रशासन दोनों की नजरें इस आंदोलन पर टिकी हुई हैं।

देवेंद्र महतो के अनशन को लेकर छात्रों ने दी सफाई:
पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। छात्रों के अनुसार, देवेंद्र महतो लगातार आमरण अनशन पर हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनसे कम-से-कम पानी पीने की अपील की थी। इसी आग्रह के बाद उन्होंने केवल पानी ग्रहण किया, लेकिन भोजन नहीं किया और न ही अपना अनशन समाप्त किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि इस घटना को लेकर कई तरह की भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं, जिससे आंदोलन की गंभीरता को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।

स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद आंदोलन जारी:
भूख हड़ताल का असर अब प्रदर्शनकारी छात्रों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। छात्रों का कहना है कि लगातार कई दिनों से भोजन नहीं करने के कारण कमजोरी बढ़ रही है और कई लोगों को खड़े होने तक में परेशानी हो रही है। आंदोलनकारी छात्रों ने बताया कि डॉक्टर समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यह संघर्ष व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे राज्य के प्रतियोगी छात्रों के अधिकारों की लड़ाई है।

सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप:
छात्र नेता राहुल क्रांति ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार बातचीत की बात तो कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि छात्र प्रतिनिधि बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार की ओर से सकारात्मक पहल दिखाई नहीं दे रही। राहुल क्रांति के अनुसार, आंदोलन और भूख हड़ताल कई दिनों से जारी है, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब तक धरनास्थल पर छात्रों का हालचाल जानने भी नहीं पहुंचे। छात्रों का कहना है कि सरकार यदि वास्तव में संवेदनशील होती तो अब तक कोई स्पष्ट निर्णय सामने आ चुका होता।

CBI जांच की मांग पर कायम प्रदर्शनकारी:
आंदोलन की सबसे बड़ी मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। छात्रों का कहना है कि यदि राज्य सरकार स्वयं अपनी एजेंसियों से जांच करा रही है, तो निष्पक्षता को लेकर सवाल बने रहेंगे। उनका मानना है कि केवल स्वतंत्र जांच ही अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम कर सकती है।

मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी उठी मांग:
आंदोलन के बीच कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि सरकार ने भर्ती विवाद को गंभीरता से नहीं लिया और युवाओं की चिंताओं की अनदेखी की। हालांकि आंदोलन के कई प्रतिनिधि अभी भी मुख्य रूप से भर्ती प्रक्रिया में सुधार, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर ही जोर दे रहे हैं।

10 अगस्त को विधानसभा घेराव की तैयारी:
आंदोलन अब अगले चरण में प्रवेश करने जा रहा है। छात्रों ने घोषणा की है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस कार्यक्रम में राज्यभर से हजारों छात्र शामिल होंगे। उनका कहना है कि यह पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध होगा।

सरकार ने क्या कहा:
राज्य सरकार लगातार यह कह रही है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले भी भरोसा दिला चुके हैं कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और युवाओं को न्याय मिलेगा। इसी क्रम में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी कहा कि यह केवल पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि कथित तौर पर गलत तरीके से हुई ‘बैकडोर’ नियुक्तियों का मामला है। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी एजेंसी या व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि वास्तविक अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो और विपक्ष भी इस मुद्दे के समाधान में सहयोग करे।

भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग:
प्रदर्शनकारी केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहते। उनकी मांग है कि JPSC, JSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रणाली में व्यापक सुधार किया जाए। वे चाहते हैं कि भविष्य में परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, मूल्यांकन प्रक्रिया और चयन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके।

आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा का मुद्दा नहीं:
विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में चल रहा यह आंदोलन अब केवल भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं रह गया है। यह युवाओं के भरोसे, रोजगार व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। यदि सरकार और आंदोलनकारी जल्द किसी साझा समाधान तक नहीं पहुंचते, तो इसका असर आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों पर दिखाई दे सकता है। रांची में जारी छात्र आंदोलन अब झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल हो चुका है। देवेंद्र नाथ महतो के अनशन को लेकर उठी अटकलों के बीच छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। एक ओर सरकार जांच और न्याय का भरोसा दे रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र स्वतंत्र जांच, भर्ती प्रणाली में सुधार और जवाबदेही की मांग पर अडिग हैं। अब सबकी निगाहें 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव और उससे पहले सरकार की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।

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