JPSC-JSSC विवाद: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि युवाओं के गुस्से और उम्मीदों का भी सबसे बड़ा मंच बन चुकी है। राज्य की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब केवल विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया, बल्कि सरकार की नीतियों और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा है। विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में दो छात्राओं सहित पांच और छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इसके साथ ही आमरण अनशन पर बैठे लोगों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। लेकिन आंदोलनकारी मानने को तैयार नहीं हैं। उनका स्पष्ट संदेश है “बातें नहीं, ऐक्शन और न्याय चाहिए।”
भर्ती परीक्षाओं पर उठे सवालों से शुरू हुआ आंदोलन:
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोप लंबे समय से उठते रहे हैं। लेकिन हाल के घटनाक्रम के बाद छात्रों का असंतोष खुलकर सामने आ गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इसी के विरोध में पिछले कई दिनों से राजधानी रांची में धरना-प्रदर्शन चल रहा है। आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक होता गया और अब यह राज्य के विभिन्न जिलों के अभ्यर्थियों का साझा आंदोलन बन चुका है।
भूख हड़ताल ने आंदोलन को दिया नया मोड़:
आंदोलन के शुरुआती चरण में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन पर बैठे थे। अब उनके समर्थन में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले दो छात्राओं सहित पांच अन्य छात्रों ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका दावा है कि यह केवल कुछ छात्रों की लड़ाई नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें:
प्रदर्शनकारी कई अहम मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा को रद्द करने की है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही। इसके अलावा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में व्यापक सुधार की भी मांग की जा रही है। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
CBI या स्वतंत्र जांच की मांग क्यों:
आंदोलनकारी केवल विभागीय जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि जांच राज्य की एजेंसियां करेंगी तो निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे। इसलिए वे पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या राज्य के बाहर के किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से कराने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि केवल स्वतंत्र जांच ही भर्ती प्रक्रिया पर जनता का भरोसा दोबारा कायम कर सकती है।
सरकार ने बातचीत का संकेत दिया:
बढ़ते आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उनके अनुसार, सरकार केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि ऐसा समाधान तलाशना चाहती है जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार का दावा है कि जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस फैसले चाहिए।
‘तिरंगा मार्च’ की तैयारी:
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति भी तैयार कर ली है। मंच के प्रवक्ता जीवन कुमार के अनुसार, आंदोलन के अगले चरण में राज्यव्यापी ‘तिरंगा मार्च’ निकाला जा सकता है। इसके लिए जल्द ही कोर कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। आंदोलनकारी चाहते हैं कि राज्य के हर जिले के छात्र इस अभियान से जुड़ें।
छात्राओं ने भी संभाली आंदोलन की कमान:
इस आंदोलन की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बड़ी संख्या में छात्राओं की भागीदारी देखने को मिल रही है। भूख हड़ताल पर बैठीं छात्रा सबिता कुमारी ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, इसलिए उन्हें अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा। वहीं दूसरी छात्रा हबीबा ने कहा कि मुख्यमंत्री राज्य के अभिभावक हैं और उन्हें युवाओं की आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार यदि वास्तव में संवेदनशील है तो इसका प्रमाण कार्रवाई से दिखना चाहिए, केवल आश्वासन से नहीं।
CID की जांच कितनी आगे बढ़ी:
राज्य सरकार ने कथित अनियमितताओं की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंपी है। जांच एजेंसी अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से कई दौर की पूछताछ की जा चुकी है। जांच के दौरान रांची, पलामू, बोकारो, हजारीबाग और धनबाद समेत कई जिलों में छापेमारी भी की गई है। CID का कहना है कि जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य परीक्षा भी हुई स्थगित:
भर्ती प्रक्रिया को लेकर बढ़ते विवाद का असर परीक्षा कार्यक्रम पर भी पड़ा है। झारखंड लोक सेवा आयोग ने प्रस्तावित संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा फिलहाल स्थगित कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा स्थगित होना इस बात का संकेत है कि आयोग भी पूरे विवाद को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि इससे हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी और भविष्य पर भी असर पड़ा है।
सरकार के सामने बढ़ती चुनौती:
झारखंड में यह आंदोलन अब केवल भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह युवाओं के भरोसे, रोजगार व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता का बड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। ऐसे में सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों तरह का दबाव लगातार बढ़ रहा है। रांची में चल रहा छात्र आंदोलन इस समय झारखंड की सबसे बड़ी जनचर्चा बन चुका है। एक ओर सरकार जांच और बातचीत की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र कार्रवाई और जवाबदेही की मांग पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार का फैसला यह तय करेगा कि यह आंदोलन शांत होता है या फिर राज्यव्यापी जनआंदोलन का रूप लेता है। फिलहाल इतना साफ है कि झारखंड के युवा अब केवल वादों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं; वे पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और न्याय की स्पष्ट गारंटी चाहते हैं।
Leave a Reply