Jharkhand News: दो बार MA, दो बार चुनाव और अब छात्र आंदोलन का चेहरा… कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों एक बड़े छात्र आंदोलन का केंद्र बनी हुई है। राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर हैं। आंदोलन को 12 दिन से अधिक समय हो चुका है और इसका नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गए हैं। 2 अगस्त से शुरू हुई उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है। सरकार और छात्रों के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल समाधान निकलता नहीं दिख रहा। दिलचस्प बात यह है कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो केवल छात्र नेता ही नहीं, बल्कि दो बार स्नातकोत्तर (एमए) कर चुके हैं और दो अलग-अलग चुनाव भी लड़ चुके हैं। शिक्षा, राजनीति और सामाजिक सक्रियता का यह मिश्रण उन्हें झारखंड के युवाओं के बीच एक अलग पहचान देता है।

छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे देवेंद्र महतो:
झारखंड में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलन की अगुवाई JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच कर रहा है, जिसके प्रमुख चेहरों में देवेंद्र नाथ महतो सबसे आगे हैं। 2 अगस्त से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। बाद में उनके समर्थन में मंच के पांच अन्य सदस्य भी आमरण अनशन पर बैठ गए। महतो के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी, लेकिन उन्होंने अपनी मांगों से पीछे हटने से इनकार कर दिया।

शिक्षा से लेकर राजनीति तक, कैसा रहा देवेंद्र महतो का सफर:
35 वर्षीय देवेंद्र नाथ महतो का संबंध रांची से है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई झारखंड में ही पूरी की। वर्ष 2006 में मैट्रिक और 2008 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। इसके बाद 2014 में स्नातक (बीए) की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा की ओर उनका रुझान लगातार बना रहा। वर्ष 2017 में उन्होंने विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग से बी.एड. किया। इसके बाद 2020 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय में एमए की डिग्री प्राप्त की। यहीं नहीं, उन्होंने 2022 में उसी विश्वविद्यालय से कुर्माली भाषा में दूसरा एमए भी किया। दो अलग-अलग विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के कारण वे राज्य के शिक्षित युवा नेताओं में गिने जाते हैं।

दो चुनाव भी लड़ चुके हैं देवेंद्र महतो:
छात्र राजनीति और सामाजिक आंदोलनों के साथ-साथ देवेंद्र महतो ने सक्रिय राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने रांची संसदीय सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन चुनाव ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखी। चुनावी सफलता भले नहीं मिली, लेकिन युवाओं के मुद्दों को लेकर उनकी पहचान लगातार मजबूत होती गई।

आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई:
देवेंद्र महतो के अनुसार पूरे विवाद की शुरुआत 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद हुई। उनका आरोप है कि परीक्षा परिणामों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद 5 जुलाई से विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया। 7 जुलाई को राज्यपाल से मुलाकात कर शिकायत सौंपी गई। 8 जुलाई को प्रदर्शन और पुतला दहन किया गया। 20 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर कथित गड़बड़ियों के दस्तावेज भी सौंपे गए। महतो का कहना है कि लगातार शिकायतों और साक्ष्य देने के बावजूद सरकार ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद आंदोलन और तेज हो गया।

क्या हैं आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें:
प्रदर्शन कर रहे छात्र केवल एक परीक्षा को लेकर विरोध नहीं जता रहे हैं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना, JSSC की भर्ती प्रणाली में पारदर्शी सुधार लागू करना और कथित अनियमितताओं की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पैनल से कराना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है, इसलिए केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं होगी।

सरकार ने बातचीत की पहल की, लेकिन बनी रही दूरी:
आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और बातचीत के लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं। बुधवार को राज्य सरकार की ओर से दो वरिष्ठ अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री से बातचीत का प्रस्ताव दिया। सरकार ने पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री यदि बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें छात्रों के बीच आकर संवाद करना चाहिए। उनका मानना है कि आंदोलन का समाधान केवल औपचारिक बैठक से नहीं बल्कि खुली बातचीत से निकल सकता है।

सोनम वांगचुक की अपील के बाद बदला फैसला:
देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल लगातार लंबी होती जा रही थी। इस दौरान उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने उनसे फोन पर बातचीत की। वांगचुक ने कहा कि भोजन का त्याग आंदोलन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन पानी न पीना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है और यह आत्मघाती कदम बन सकता है। वांगचुक की अपील का सम्मान करते हुए महतो ने अपने अनशन के चौथे दिन पानी पीने का फैसला किया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती।

अब तक सरकार ने क्या कार्रवाई की है:
झारखंड सरकार ने मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंपी है। जांच एजेंसी अब तक कथित अनियमितताओं के सिलसिले में 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से कई दौर की पूछताछ की जा चुकी है। रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद समेत कई जिलों में छापेमारी भी हुई है। सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है, जबकि आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि केवल जांच शुरू करना पर्याप्त नहीं है और दोषियों पर जल्द कार्रवाई होनी चाहिए।

झारखंड की राजनीति और युवा आंदोलन के लिए अहम मोड़:
देवेंद्र नाथ महतो का आंदोलन अब केवल भर्ती परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है। यह झारखंड के युवाओं के रोजगार, सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुका है। दो बार एमए करने वाले और दो चुनाव लड़ चुके महतो आज हजारों अभ्यर्थियों की आवाज बनकर सामने आए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ता है या फिर झारखंड में इसका दायरा और व्यापक हो जाता है। फिलहाल इतना तय है कि देवेंद्र नाथ महतो का नाम अब राज्य की छात्र राजनीति और भर्ती सुधार की बहस के केंद्र में आ चुका है।

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