साई पल्लवी की तलवार, रणबीर का पुष्पक विमान… क्यों हो रही है ‘रामायण’ की तुलना ‘बाहुबली’ से?

Bollywood News : नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ का ट्रेलर और नए विजुअल्स सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प बहस शुरू हो गई है। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग इसकी तुलना भारतीय सिनेमा की सबसे सफल महाकाव्य फिल्मों में शामिल ‘बाहुबली’ से कर रहा है। वजह सिर्फ दोनों फिल्मों का विशाल स्केल नहीं है, बल्कि कई ऐसे दृश्य हैं जिनमें विजुअल भाषा, सेट डिजाइन और युद्ध की प्रस्तुति एक जैसी महसूस होती है। हालांकि, यह तुलना केवल समानताओं तक सीमित नहीं है। दोनों फिल्मों की मेकिंग फिलॉसफी, विजुअल तकनीक और कहानी कहने के तरीके में बड़े अंतर भी दिखाई देते हैं। ThePage1 ने इन प्रमुख पहलुओं का विश्लेषण किया।

CGI बनाम रियल लोकेशन: सबसे बड़ा अंतर
‘बाहुबली’ की सबसे बड़ी ताकत उसका रियल वर्ल्ड टेक्सचर था। एसएस राजामौली ने विशाल सेट, वास्तविक लोकेशन और हजारों जूनियर आर्टिस्ट्स का इस्तेमाल कर युद्ध और साम्राज्य को जीवंत बनाया था। VFX का उपयोग हुआ, लेकिन वह वास्तविक सेट्स को और भव्य बनाने के लिए था। इसके उलट, ‘रामायण’ के ट्रेलर में कई दृश्य पूरी तरह डिजिटल वातावरण में तैयार किए गए प्रतीत होते हैं। विशाल महल, पर्वत, युद्धभूमि और कई बैकग्राउंड आधुनिक CGI पर आधारित नजर आते हैं। इससे फिल्म का फैंटेसी स्केल तो बढ़ता है, लेकिन कुछ दर्शकों को उसमें वास्तविकता का स्पर्श कम महसूस हो रहा है।

क्राउड सीन्स: असली भीड़ या डिजिटल सेना?
सोशल मीडिया पर सबसे अधिक चर्चा भीड़ वाले दृश्यों की हो रही है। ‘बाहुबली’ में युद्ध के दौरान सैनिकों के चेहरे, हावभाव और गतिविधियां अलग-अलग दिखाई देती थीं। इससे हर फ्रेम जीवंत लगता था। वहीं ‘रामायण’ के कई फ्रेम्स में भीड़ का बड़ा हिस्सा CGI से तैयार किया गया दिखाई देता है। ऊपर से देखने पर सैनिकों का पैटर्न काफी हद तक एक जैसा लगता है, जिससे कुछ दर्शकों ने इसे “डिजिटल आर्मी” कहा है। हालांकि यह आधुनिक हॉलीवुड फिल्मों में भी सामान्य तकनीक है, लेकिन दर्शक अभी भी वास्तविक भीड़ वाले दृश्यों को अधिक प्रभावशाली मानते हैं।

झरने वाले दृश्य: प्राकृतिक एहसास या डिजिटल सौंदर्य?
दोनों फिल्मों के झरने वाले दृश्य भी तुलना का केंद्र बने हुए हैं। ‘बाहुबली’ में प्रभास का झरने के बीच चढ़ना और पानी के साथ संघर्ष करना वास्तविक वातावरण का अनुभव देता है। पानी की गति, चट्टानों की बनावट और प्रकाश का संतुलन दृश्य को वास्तविक बनाता है। दूसरी ओर ‘रामायण’ में रणबीर कपूर का झरने के सामने प्रार्थना वाला दृश्य बेहद सुंदर और शांत दिखाई देता है, लेकिन कई दर्शकों को बैकग्राउंड डिजिटल प्रतीत होता है। यह दृश्य आध्यात्मिक तो लगता है, लेकिन प्रकृति का रॉ एहसास अपेक्षाकृत कम महसूस होता है।

तलवार चलातीं साई पल्लवी और देवसेना की याद
ट्रेलर में सबसे अधिक सराहे गए दृश्यों में साई पल्लवी का युद्ध रूप भी शामिल है। हाथ में ढाल और तलवार लिए उनका लुक सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। कई दर्शकों ने इसकी तुलना ‘बाहुबली’ की देवसेना से की है। हालांकि दोनों किरदारों की परिस्थितियां और कहानियां अलग हैं, लेकिन एक महिला योद्धा के रूप में प्रस्तुतिकरण ने दर्शकों को देवसेना की याद जरूर दिलाई है।

पुष्पक विमान और उड़ते युद्धपोत की समानता
‘रामायण’ के ट्रेलर में पहली बार पुष्पक विमान की भव्य झलक दिखाई गई है। इसके विशाल पंख, सुनहरी डिजाइन और उड़ान वाले दृश्य ने कई लोगों को ‘बाहुबली’ में दिखाई गई उड़ती युद्ध संरचनाओं की याद दिलाई। फर्क इतना है कि ‘बाहुबली’ का डिजाइन अधिक पारंपरिक और युद्धप्रधान था, जबकि ‘रामायण’ का पुष्पक विमान अधिक दिव्य और पौराणिक शैली में बनाया गया है।

युद्ध का तरीका भी बदला हुआ है
राजामौली की फिल्मों में युद्ध के दौरान धूल, मिट्टी, पसीना और वास्तविक संघर्ष का अनुभव मिलता है। ‘रामायण’ के युद्ध दृश्य अधिक सिनेमाई, डार्क टोन और हाई-एंड विजुअल इफेक्ट्स से भरपूर दिखाई देते हैं। यह प्रस्तुति आधुनिक फैंटेसी फिल्मों के करीब लगती है। यानी दोनों फिल्मों का उद्देश्य समान होते हुए भी प्रस्तुति की भाषा अलग है।

ऐरावत बनाम युद्ध हाथी
‘बाहुबली’ में विशाल युद्ध हाथियों का उपयोग सैन्य शक्ति दिखाने के लिए किया गया था।
‘रामायण’ में देवराज इंद्र के दिव्य हाथी ऐरावत की झलक दिखाई गई है। यह पूरी तरह पौराणिक कल्पना पर आधारित दृश्य है और CGI के जरिए तैयार किया गया है। युद्ध हाथी और दिव्य हाथी दोनों की भूमिका अलग है, लेकिन विशाल जीवों का उपयोग दोनों फिल्मों को दृश्यात्मक रूप से भव्य बनाता है।

सेट डिजाइन में सबसे बड़ा फर्क
‘बाहुबली’ का महिष्मती साम्राज्य वास्तविक सेट और डिजिटल एक्सटेंशन का शानदार मिश्रण था। ‘रामायण’ में दिखाई देने वाले महल, स्तंभ और विशाल प्रांगण अधिक साफ-सुथरे और चमकदार दिखाई देते हैं। कुछ दर्शकों का मानना है कि इनमें प्राचीन समय की घिसावट और वास्तविक बनावट अपेक्षाकृत कम महसूस होती है। हालांकि यह भी संभव है कि फिल्म की विजुअल स्टाइल जानबूझकर अधिक दिव्य और स्वर्गीय रखी गई हो।

क्या यह सिर्फ कॉपी है?
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे ‘बाहुबली’ से प्रेरित बता रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पौराणिक और महाकाव्य फिल्मों में विशाल युद्ध, उड़ते वाहन, भव्य महल और विशाल सेनाएं सामान्य सिनेमाई तत्व हैं। आज की फिल्मों में CGI का इस्तेमाल भी पहले की तुलना में कहीं अधिक हो चुका है। इसलिए कुछ समानताएं तकनीकी विकास का परिणाम भी हो सकती हैं, न कि केवल प्रेरणा का।

ThePage1 Analysis
‘रामायण’ और ‘बाहुबली’ की तुलना फिलहाल ट्रेलर और कुछ चुनिंदा दृश्यों के आधार पर हो रही है। अंतिम निष्कर्ष फिल्म रिलीज़ होने के बाद ही निकलेगा। जहां ‘बाहुबली’ ने वास्तविक सेट्स, जमीन से जुड़े विजुअल्स और भावनात्मक युद्ध दृश्यों के दम पर इतिहास रचा, वहीं ‘रामायण’ आधुनिक CGI, अंतरराष्ट्रीय स्तर के VFX और पौराणिक भव्यता के सहारे नई पीढ़ी के दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। दोनों फिल्मों का उद्देश्य भारतीय महाकाव्य को बड़े पर्दे पर भव्य रूप देना है, लेकिन उनकी सिनेमाई भाषा अलग है। यही वजह है कि तुलना तो स्वाभाविक है, मगर यह तय करना कि कौन बेहतर है, दर्शकों का फैसला फिल्म रिलीज़ होने के बाद ही होगा।

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